कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया में महिला राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाने वाली ऑनलाइन नफ़रत और यौन हिंसा से भरी धमकियों में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। देश की विभिन्न पार्टियों से जुड़ी महिलाएँ—मंत्री, सांसद और स्थानीय प्रतिनिधि—खुलकर बता रही हैं कि इंटरनेट पर फैलती यह भाषा अब वास्तविक जीवन में भी ख़तरा बनकर उभर रही है।
महिला नेताओं का कहना है कि इंटरनेट पर उन्हें मिलने वाले संदेश न केवल अपमानजनक होते हैं, बल्कि कई बार इनमें भयावह, यौन हिंसा को बढ़ावा देने वाले शब्द भी शामिल होते हैं। कुछ नेताओं ने बताया कि इस तरह के पोस्ट अक्सर संगठित अभियान की तरह दिखाई देते हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से हतोत्साहित करना होता है।
ऑस्ट्रेलिया की संघीय और राज्य सरकारों ने स्वीकार किया है कि यह समस्या लोकतांत्रिक भागीदारी और महिला सुरक्षा—दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर नफ़रत भरे कंटेंट के फ़ैलाव को रोकने के लिए कड़े नियमन और तेज़ कार्रवाई की ज़रूरत है।
कई महिला सांसदों ने उदाहरण देते हुए कहा कि उनके दफ़्तरों में धमकी भरे पत्रों और फ़ोन कॉल्स की संख्या बढ़ गई है। कुछ मामलों में तो सुरक्षा एजेंसियों को हस्तक्षेप करना पड़ा है। उनका कहना है कि “ऑनलाइन जो शुरू होता है, वह अक्सर ऑफ़लाइन भी आ जाता है,” और यही सबसे बड़ी चिंता का कारण है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह प्रवृत्ति सिर्फ़ ऑस्ट्रेलिया तक सीमित नहीं है; दुनिया के कई देशों में महिला नेताओं को इसी तरह के हमलों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में हाल के वर्षों में इसकी गति और भाषा दोनों अधिक आक्रामक हुई हैं।
महिला नेताओं ने जनता से अपील की है कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए समाज को एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण तैयार करना होगा। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था तभी सशक्त रह सकती है, जब हर व्यक्ति—लिंग, जाति, पृष्ठभूमि या विचारधारा से परे—खुलकर अपनी भूमिका निभा सके।