सिडनी मोटरवे टोल में बड़े बदलाव की गुप्त योजना, दो चरणों में लागू होगी नई व्यवस्था

सिडनी मोटरवे टोल में बड़े बदलाव की गुप्त योजना, दो चरणों में लागू होगी नई व्यवस्था

सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में मोटरवे टोल व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव किए जाने की तैयारी सामने आई है। राज्य सरकार की एक गोपनीय परियोजना, जिसे “प्रोजेक्ट शार्लेट” नाम दिया गया है, के तहत शहर की टोल सड़कों की कीमतों में सुधार दो चरणों में करने की योजना बनाई गई है।

सूत्रों के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य मोटर चालकों पर बढ़ते टोल शुल्क के बोझ को कम करना और पूरे नेटवर्क में अधिक पारदर्शी एवं संतुलित दरें लागू करना है। हाल ही में सामने आए गोपनीय दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि सरकार पहले चरण में मौजूदा दरों की समीक्षा और कुछ मार्गों पर राहत देने की योजना बना रही है, जबकि दूसरे चरण में व्यापक संरचनात्मक बदलाव किए जाएंगे।

दो चरणों में होगा सुधार

पहले चरण में कुछ प्रमुख मोटरवे पर टोल दरों को समायोजित कर राहत देने का प्रस्ताव है। इससे उन इलाकों के यात्रियों को फायदा मिल सकता है, जहां प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने वालों को अधिक टोल चुकाना पड़ता है।

दूसरे चरण में पूरे टोल नेटवर्क की संरचना को एक समान ढांचे में लाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि अलग-अलग सड़कों पर अलग-अलग दरों की जटिलता कम हो सके। सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में टोल प्रणाली अधिक सरल और पारदर्शी बने।

एम7 और एम12 इंटरचेंज का निर्माण अंतिम चरण में

इसी बीच, पश्चिमी सिडनी में एम7 मोटरवे और नई एम12 मोटरवे के बीच बन रहा इंटरचेंज लगभग पूरा होने के करीब है। यह परियोजना पश्चिमी सिडनी हवाई अड्डे और आसपास के इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि नई सड़क अवसंरचना के शुरू होने से यातायात दबाव कम होगा और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, टोल दरों में संभावित बदलाव को लेकर स्थानीय निवासियों और नियमित यात्रियों में उत्सुकता बनी हुई है।

जनता की प्रतिक्रिया अहम

सरकार की इस प्रस्तावित योजना पर अंतिम निर्णय लेने से पहले व्यापक परामर्श प्रक्रिया अपनाए जाने की संभावना है। विपक्षी दलों ने पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा है कि टोल दरों में किसी भी बदलाव से पहले आम जनता को स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।

आने वाले महीनों में सरकार इस संबंध में आधिकारिक घोषणा कर सकती है। फिलहाल, “प्रोजेक्ट शार्लेट” को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।