ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने यह पुष्टि करने से इनकार कर दिया है कि क्या वह उन तीन विदेश मंत्रियों में शामिल थीं जिन्हें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की नकली आवाज़ में भेजे गए एआई-जनित फर्जी संदेशों का निशाना बनाया गया।
क्या था मामला?
यह घटना सबसे पहले वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में सामने आई, जिसमें बताया गया कि एक साइबर जालसाज ने कम से कम पांच हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों को निशाना बनाया। इनमें तीन विदेश मंत्री, एक अमेरिकी गवर्नर और एक कांग्रेस सदस्य शामिल हैं। फर्जी संदेश टेक्स्ट और वॉइस के ज़रिए भेजे गए, जिनमें कुछ 'सिग्नल' जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप का भी इस्तेमाल हुआ।
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट की चेतावनी
3 जुलाई को जारी स्टेट डिपार्टमेंट के एक केबल में कहा गया कि जालसाज ने एआई के ज़रिए मार्को रुबियो की आवाज़ की हूबहू नकल की और फर्जी संदेश भेजे, जिनका उद्देश्य जानकारी या खातों तक पहुंच बनाना था।
इसके साथ ही यह भी बताया गया कि स्कैमर के पास डिपार्टमेंट की आंतरिक प्रणालियों और नामकरण नियमों की गहरी समझ थी। स्कैमर द्वारा भेजे गए लिखित संदेशों में डिप्लोमैटिक टेक्नोलॉजी ब्यूरो की नकली ब्रांडिंग और एक फर्जी @state.gov ईमेल पता इस्तेमाल हुआ।
पेनी वोंग का जवाब
इस मामले में जब विदेश मंत्री पेनी वोंग से पूछा गया कि क्या वह भी इस साइबर हमले की शिकार हुई हैं, तो उनकी प्रवक्ता ने जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि मंत्री इस समय मलेशिया में ASEAN शिखर सम्मेलन में भाग लेने गई हैं और जांच पूरी होने तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी।
अमेरिका ने दी सुरक्षा की गारंटी
अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “विभाग अपनी सूचना की सुरक्षा को गंभीरता से लेता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए साइबर सुरक्षा उपायों को लगातार मजबूत कर रहा है।”