महाराष्ट्र को पहली महिला उपमुख्यमंत्री मिलीं, सुनेत्रा पवार ने ली शपथ

महाराष्ट्र को पहली महिला उपमुख्यमंत्री मिलीं, सुनेत्रा पवार ने ली शपथ

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में गुरुवार को एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही वह राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बन गईं। मुंबई में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मौजूद रहे।

अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद राज्य की राजनीति में लंबे समय से बना सस्पेंस सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण के साथ समाप्त हो गया। पति के निधन के महज तीन दिन बाद उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपे जाने को राजनीतिक हलकों में भावनात्मक और रणनीतिक—दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तीन अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी

महाराष्ट्र सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, सुनेत्रा पवार को तीन प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें

  • राज्य उत्पाद शुल्क विभाग,

  • खेल एवं युवा कल्याण विभाग,

  • अल्पसंख्यक विकास एवं औकाफ विभाग

शामिल हैं। मुख्यमंत्री द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है। इन विभागों के जरिए सुनेत्रा पवार को सामाजिक, युवा और अल्पसंख्यक वर्ग से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम करने का अवसर मिलेगा।

वित्त मंत्रालय मुख्यमंत्री के पास

हालांकि, दिवंगत अजित पवार के पास रहा वित्त मंत्रालय सुनेत्रा पवार को नहीं दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वित्त विभाग की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्वयं संभालेंगे। इसका अर्थ यह भी है कि इस वर्ष का महाराष्ट्र बजट मुख्यमंत्री ही पेश करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बजट जैसे रणनीतिक विभाग को अपने पास रखकर मुख्यमंत्री प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करना चाहते हैं।

विधायक दल की नेता बनने के बाद उपमुख्यमंत्री पद तक

उपमुख्यमंत्री बनाए जाने से पहले एनसीपी (अजित गुट) ने सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता चुना था। मुंबई के विधान भवन में हुई बैठक में पार्टी के 40 विधायकों ने सर्वसम्मति से उनके नाम पर मुहर लगाई। बैठक से पहले वरिष्ठ नेताओं द्वारा उनसे मुलाकात किए जाने से ही उनके नाम पर सहमति के संकेत मिल गए थे।

भावनात्मक फैसला या सियासी रणनीति

अजित पवार के अचानक निधन के बाद एनसीपी और महायुति सरकार के सामने नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया था। ऐसे समय में सुनेत्रा पवार को आगे बढ़ाना पार्टी को एकजुट रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। समर्थकों के बीच ‘वहिनी’ के नाम से पहचानी जाने वाली सुनेत्रा पवार अब सत्ता के शीर्ष पदों में शामिल हो गई हैं।

अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि वह अपने मंत्रालयों के माध्यम से प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर किस तरह अपनी पहचान स्थापित करती हैं।