नई दिल्ली, 16 फरवरी 2026। 1993 मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने उसकी रिहाई संबंधी याचिका पर सीधे सुनवाई करने से इनकार करते हुए उसे बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा है। साथ ही अदालत ने हाई कोर्ट को मामले पर शीघ्र सुनवाई करने का निर्देश भी दिया है।
अबू सलेम ने अपनी याचिका में दावा किया था कि वह 25 वर्ष की सजा पूरी कर चुका है और इसके बावजूद उसे 10 महीने से अधिक समय से जेल में अवैध रूप से रखा गया है। उसने दलील दी कि भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते के तहत उसकी सजा 25 साल से अधिक नहीं हो सकती, इसलिए उसे तत्काल रिहा किया जाए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में तथ्यों और कानूनी पहलुओं की विस्तृत जांच की आवश्यकता है, जिसके लिए उचित मंच हाई कोर्ट है। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह बॉम्बे हाई कोर्ट में अपनी अर्जी दायर करे। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस चरण पर मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
गौरतलब है कि 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 250 से अधिक लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस मामले में अबू सलेम को दोषी ठहराते हुए विशेष अदालत ने सजा सुनाई थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 11 नवंबर 2005 को उसे पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था।
भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते की शर्तों के अनुसार, सलेम को मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता और उसके कारावास की अवधि 25 वर्ष से अधिक नहीं हो सकती। इसी आधार पर सलेम ने अपनी रिहाई की मांग की है।
अब मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में सुना जाएगा, जहां यह तय होगा कि सलेम की सजा की अवधि की गणना किस प्रकार की जाए और क्या उसे रिहाई का लाभ मिल सकता है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उसकी रिहाई पर रोक बनी हुई है।