सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: धर्मांतरण पर खत्म होगा अनुसूचित जाति का दर्जा

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: धर्मांतरण पर खत्म होगा अनुसूचित जाति का दर्जा

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) से संबंध रखने के बावजूद किसी अन्य धर्म—जैसे ईसाई या मुस्लिम—को अपनाता है, तो वह अपना SC दर्जा खो देता है। अदालत ने इस मामले में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।


🔍 क्या है मामला?

यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था, जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था और पादरी (Pastor) के रूप में कार्य कर रहा था। उसने कुछ लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया था।

आरोपियों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता अब ईसाई धर्म अपना चुका है, इसलिए वह SC/ST कानून के तहत मिलने वाले संरक्षण का हकदार नहीं है।


⚖️ हाईकोर्ट का फैसला

30 अप्रैल 2025 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा:

  • ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं होती
  • इसलिए धर्मांतरण करने वाला व्यक्ति SC/ST एक्ट के तहत लाभ नहीं ले सकता
  • अदालत ने केस से SC/ST एक्ट की धाराएं हटाने का आदेश दिया

इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।


🏛️ सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा:

  • संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के अनुसार
    👉 केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वाले ही SC श्रेणी में आते हैं
  • यदि कोई व्यक्ति इन धर्मों से बाहर किसी अन्य धर्म को अपनाता है
    👉 तो उसका SC दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि:

“यह महत्वपूर्ण नहीं है कि व्यक्ति बाद में अपने मूल धर्म में लौटा या नहीं, बल्कि यह देखा जाएगा कि घटना के समय वह किस धर्म का पालन कर रहा था।”


📌 फैसले की अहम बातें

  • धर्मांतरण के बाद SC दर्जा खत्म हो जाता है
  • SC/ST एक्ट के तहत सुरक्षा पाने का अधिकार भी समाप्त हो जाता है
  • व्यक्ति के वर्तमान धार्मिक आचरण को आधार माना जाएगा

📊 क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?

यह फैसला कई कारणों से अहम माना जा रहा है:

  • SC/ST कानून के दायरे को स्पष्ट करता है
  • धर्मांतरण और सामाजिक पहचान के बीच संबंध तय करता है
  • भविष्य में ऐसे मामलों के लिए कानूनी मिसाल बनेगा