सिडनी के अस्पतालों में नर्सों से कराई जा रही “जेल प्रहरी” जैसी ड्यूटी

मानसिक स्वास्थ्य कानून के प्रावधान पर बढ़ा विवाद, वरिष्ठ मनोचिकित्सक की चेतावनी

सिडनी के अस्पतालों में नर्सों से कराई जा रही “जेल प्रहरी” जैसी ड्यूटी

सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर के कुछ अस्पतालों में नर्सों से मरीजों की देखभाल के साथ-साथ “जेल प्रहरी” जैसी जिम्मेदारियाँ निभाने की अपेक्षा किए जाने को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। मानसिक स्वास्थ्य कानून के तहत जारी किए जाने वाले “सेक्शन 19B” आदेश अब बहस का केंद्र बन गए हैं।

वरिष्ठ मनोचिकित्सकों का कहना है कि जब अस्पतालों को इलाज केंद्र के बजाय “कारागार” की तरह संचालित किया जाता है, तो हिंसा और कथित हत्याओं जैसी घटनाएँ आश्चर्यजनक नहीं रह जातीं। उनका आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के बीच संतुलन बिगड़ने से मरीजों और स्टाफ—दोनों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

क्या है सेक्शन 19B आदेश?

सेक्शन 19B प्रावधान के तहत कुछ आरोपित या दोषसिद्ध व्यक्तियों को जेल के बजाय अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य उपचार के लिए भेजा जाता है। उद्देश्य यह होता है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों को चिकित्सकीय सहायता मिले। लेकिन आलोचकों का कहना है कि व्यवहार में इन अस्पतालों को उच्च सुरक्षा वाले निरोध केंद्र की तरह चलाया जा रहा है।

नर्सों पर बढ़ता दबाव

स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि वे प्रशिक्षित नर्स हैं, सुरक्षा गार्ड नहीं। उनका तर्क है कि पर्याप्त सुरक्षा स्टाफ की कमी के कारण उन्हें मरीजों की निगरानी, नियंत्रण और जोखिम प्रबंधन जैसे कार्य करने पड़ते हैं, जिससे उनका मूल चिकित्सकीय कार्य प्रभावित होता है।

एक वरिष्ठ मनोचिकित्सक ने चेतावनी दी है कि यदि अस्पतालों का वातावरण उपचारात्मक के बजाय दंडात्मक हो जाएगा, तो मरीजों की मानसिक स्थिति और बिगड़ सकती है। इससे अप्रत्याशित और गंभीर घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।

सरकार और प्रशासन का पक्ष

स्वास्थ्य प्रशासन का कहना है कि मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनका दावा है कि सेक्शन 19B आदेशों का उद्देश्य उपचार और पुनर्वास सुनिश्चित करना है, न कि दंड देना। हालांकि, बढ़ती आलोचनाओं के बीच सरकार पर व्यवस्था की समीक्षा का दबाव बढ़ता जा रहा है।

व्यापक बहस की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और न्याय प्रणाली के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। अस्पतालों को सुरक्षित तो होना चाहिए, लेकिन उन्हें जेल जैसी कठोर व्यवस्था में बदलना समाधान नहीं है।

यह मुद्दा अब न केवल सिडनी बल्कि पूरे ऑस्ट्रेलिया में मानसिक स्वास्थ्य नीतियों पर व्यापक चर्चा का कारण बनता जा रहा है।