सिडनी में आवास संकट: सबसे कारगर मॉडल पर ही लगी पाबंदियां

सिडनी में आवास संकट: सबसे कारगर मॉडल पर ही लगी पाबंदियां

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में बढ़ते आवास संकट के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। एक प्रमुख थिंक टैंक ने दावा किया है कि न्यू साउथ वेल्स (NSW) सरकार ने उस प्रकार के आवासीय विकास को प्राथमिकता नहीं दी है, जो सिडनी में घरों की कमी को दूर करने के लिए सबसे प्रभावी साबित हो सकता है।

हवाई तस्वीरों में पश्चिमी सिडनी के पाररामाटा इलाके में तेज़ी से हो रहे विकास को देखा जा सकता है। ऊंची इमारतों और नए अपार्टमेंट प्रोजेक्ट्स के बावजूद, विशेषज्ञों का कहना है कि शहर को “मिड-डेंसिटी” यानी मध्यम घनत्व वाले आवास मॉडल की अधिक जरूरत है। यह मॉडल न तो बहुत ऊंची गगनचुंबी इमारतों पर आधारित होता है और न ही केवल स्वतंत्र मकानों पर, बल्कि टाउनहाउस, डुप्लेक्स और छोटे अपार्टमेंट ब्लॉकों जैसे विकल्पों को बढ़ावा देता है।

थिंक टैंक का तर्क है कि यही प्रकार का आवास सिडनी के स्थापित उपनगरों में सबसे अधिक व्यावहारिक और किफायती साबित हो सकता है। लेकिन मौजूदा ज़ोनिंग कानूनों और स्थानीय नियमों के कारण कई इलाकों में ऐसे विकास पर प्रतिबंध या सख्त पाबंदियां लगी हुई हैं। परिणामस्वरूप, बड़ी संख्या में लोग शहर के भीतर रहने का अवसर नहीं पा रहे हैं और उन्हें दूरदराज़ के इलाकों की ओर रुख करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि NSW सरकार को विक्टोरिया राज्य की नीति से सीख लेनी चाहिए। विक्टोरिया ने हाल के वर्षों में शहरी इलाकों में आवास निर्माण को आसान बनाने के लिए ज़ोनिंग नियमों में बदलाव किए हैं, जिससे मध्यम घनत्व वाले घरों को प्रोत्साहन मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सिडनी भी इसी तरह के सुधार लागू करे, तो आवास की आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

आवास विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ऊंची इमारतें बनाना या शहर के बाहरी इलाकों में विस्तार करना दीर्घकालिक समाधान नहीं है। संतुलित और योजनाबद्ध विकास, जिसमें मध्यम घनत्व वाले आवास को प्राथमिकता दी जाए, ही सिडनी के आवास संकट का टिकाऊ समाधान हो सकता है।

इस मुद्दे पर अब राजनीतिक और नीतिगत स्तर पर चर्चा तेज होने की उम्मीद है, क्योंकि बढ़ती कीमतें और किराए आम परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।