सिडनी के कई उपनगरों में प्राथमिक विद्यालयों के किंडरगार्टन वर्गों में छात्रों की संख्या में तेज़ गिरावट दर्ज की जा रही है। हालिया नामांकन आँकड़ों से पता चलता है कि महामारी से पहले की तुलना में अनेक सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो चुकी है। इस गिरावट ने शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की स्थिरता और भविष्य की योजना को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मारूब्रा इलाके के पांच वर्षीय जिमी बेली इसका एक उदाहरण हैं। जिमी को उनके आवासीय ज़ोन के अंतर्गत मारूब्रा के एक सरकारी स्कूल में दाख़िला मिलना था, लेकिन उनकी मां ने स्कूल में लगातार घटते छात्रों की संख्या को लेकर चिंता जताई। उनका मानना था कि छोटे होते स्कूल में शैक्षणिक गतिविधियाँ और सामाजिक वातावरण सीमित हो सकते हैं। इसी कारण जिमी को उनके आठ वर्षीय बड़े भाई जैक्सन के साथ रैंडविक पब्लिक स्कूल में दाख़िल कराया गया।
अभिभावकों का कहना है कि कम नामांकन वाले स्कूलों में न केवल कक्षाओं की संख्या घटती है, बल्कि शिक्षकों और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों पर भी असर पड़ता है। बच्चों को मित्र बनाने और समूह गतिविधियों में भाग लेने के सीमित अवसर मिलते हैं, जिससे उनके समग्र विकास पर प्रभाव पड़ सकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं। महामारी के बाद परिवारों का सिडनी जैसे बड़े शहरों से बाहरी क्षेत्रों की ओर पलायन, बढ़ती आवास लागत, जन्म दर में कमी और काम के बदले हुए स्वरूप जैसे कारण प्रमुख माने जा रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि निजी और वैकल्पिक शिक्षा विकल्पों की ओर बढ़ता रुझान भी सरकारी स्कूलों में नामांकन घटने का एक कारण है।
न्यू साउथ वेल्स शिक्षा विभाग ने स्वीकार किया है कि कई क्षेत्रों में नामांकन में गिरावट एक चुनौती बनकर उभरी है। विभाग का कहना है कि वह प्रभावित स्कूलों की स्थिति की समीक्षा कर रहा है और संसाधनों के बेहतर उपयोग, स्कूलों के विलय या वैकल्पिक शैक्षणिक योजनाओं जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में सिडनी के शहरी उपनगरों में स्कूलों की संरचना और शिक्षा नीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।