नई दिल्ली/सिडनी। ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटियों में “कॉन्ट्रैक्ट चीटिंग” का जाल तेजी से फैल रहा है। ताज़ा खुलासों में सामने आया है कि सिडनी, हांगकांग और केन्या से जुड़े आपराधिक सिंडिकेट छात्रों के असाइनमेंट, प्रोजेक्ट और यहां तक कि ऑनलाइन परीक्षाएं तक पैसे लेकर पूरा कर रहे हैं। इन नेटवर्क्स ने इस अवैध कारोबार से लाखों-करोड़ों रुपये कमाए हैं।
इसी बीच ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालय नियामक Tertiary Education Quality and Standards Agency (TEQSA) ने देशभर के कैंपसों को तत्काल चेतावनी जारी की है। एजेंसी का कहना है कि “कॉन्ट्रैक्ट चीटर्स” संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत तरीके अपना रहे हैं, जिससे अकादमिक ईमानदारी पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
जांच में पता चला है कि गिरोह सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और ईमेल के जरिए छात्रों से संपर्क करते हैं। वे बेहतर अंक दिलाने का वादा करते हैं और विषय के अनुसार शुल्क तय करते हैं।
साधारण असाइनमेंट के लिए सैकड़ों डॉलर
शोध-प्रबंध या थीसिस के लिए हजारों डॉलर
ऑनलाइन परीक्षा में “प्रॉक्सी” बैठाने के लिए अतिरिक्त रकम
हांगकांग में ऑपरेशन संभालने वाले एजेंट काम का बंटवारा करते हैं, जबकि केन्या जैसे देशों में बैठे “घोस्ट राइटर” कम लागत पर असाइनमेंट तैयार करते हैं। भुगतान क्रिप्टोकरेंसी या अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर के जरिए लिया जाता है, जिससे पहचान छिपी रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई मामलों में छात्रों को बाद में ब्लैकमेल भी किया जाता है। गिरोह असाइनमेंट का सबूत दिखाकर अतिरिक्त पैसे मांगते हैं और मना करने पर विश्वविद्यालय को सूचना देने की धमकी देते हैं। इससे छात्र मानसिक दबाव में आ जाते हैं।
TEQSA ने विश्वविद्यालयों से कहा है कि वे—
ऑनलाइन परीक्षाओं की निगरानी कड़ी करें
संदिग्ध पैटर्न पहचानने के लिए एआई टूल्स का उपयोग बढ़ाएं
छात्रों को अकादमिक ईमानदारी के नियमों के प्रति जागरूक करें
ऑस्ट्रेलिया में कॉन्ट्रैक्ट चीटिंग पहले से ही गैरकानूनी है और दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माना तथा जेल की सजा का प्रावधान है। बावजूद इसके, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क कानून से बचने के नए तरीके खोज रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां न केवल छात्रों के भविष्य को खतरे में डालती हैं, बल्कि डिग्री की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षा की साख को प्रभावित कर सकती है।