सिडनी।
सिडनी की नगर परिषद ने एक बड़ा निर्णय लेने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब तक शहर के कई नामी निजी स्कूलों के छात्र अपने अवकाश या दोपहर के भोजन के समय पास के सार्वजनिक पार्कों में खेलकूद और आराम का आनंद बिना किसी शुल्क के उठाते रहे हैं। लेकिन परिषद ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सुविधा आगे मुफ्त नहीं मिलेगी।
परिषद का कहना है कि सार्वजनिक पार्कों के रखरखाव और देखभाल पर लगातार खर्च बढ़ रहा है। सफ़ाई, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव पर लाखों डॉलर खर्च होते हैं। ऐसे में, जब परिषद वित्तीय संकट से जूझ रही है, तो उसका मानना है कि जिन निजी स्कूलों के छात्र इन पार्कों का प्रतिदिन उपयोग करते हैं, उन्हें भी अपनी हिस्सेदारी निभानी चाहिए।
योजना के तहत, उन निजी स्कूलों पर शुल्क लगाने का प्रस्ताव है जिनके छात्र नियमित रूप से पार्कों का इस्तेमाल खेल, खेलकूद गतिविधियों या अवकाश के लिए करते हैं। परिषद का मानना है कि यह कदम न केवल राजस्व जुटाने में मदद करेगा बल्कि सार्वजनिक संसाधनों के "न्यायपूर्ण उपयोग" को भी सुनिश्चित करेगा।
इस प्रस्ताव को लेकर शहर में बहस छिड़ गई है।
समर्थन में तर्क: स्थानीय निवासी और कुछ परिषद सदस्य मानते हैं कि निजी स्कूल, जो पहले से ही अभिभावकों से मोटी फीस वसूलते हैं, वे आसानी से यह शुल्क वहन कर सकते हैं। उनका कहना है कि अगर निजी संस्थान सार्वजनिक सुविधाओं का नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं, तो उनका योगदान देना न्यायसंगत है।
विरोध में तर्क: वहीं दूसरी ओर, कई लोग इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक पार्क सभी नागरिकों के लिए हैं और बच्चों को खेलने की जगह पर रोक लगाना या उसे सशुल्क करना अनुचित होगा। विरोधियों का यह भी मानना है कि बच्चों की स्वतंत्र खेल गतिविधियों पर इस तरह की बाधाएं उनके मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकती हैं।
यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इसके लागू होने पर सिडनी के कई निजी स्कूलों और उनके अभिभावकों पर सीधा असर पड़ेगा। जहां कुछ लोग इसे "न्यायपूर्ण योगदान" मान रहे हैं, वहीं अन्य इसे बच्चों की आज़ादी पर लगाम समझ रहे हैं। परिषद आने वाले समय में इस पर अंतिम निर्णय लेगी।