निर्वाचन क्षेत्रों में 37 मिलियन डॉलर की योजनाओं की रहस्यमयी सूची किसने बनाई?

हर सीट पर $400,000 खर्च करने की योजना पर सवाल बरकरार

निर्वाचन क्षेत्रों में 37 मिलियन डॉलर की योजनाओं की रहस्यमयी सूची किसने बनाई?

सिडनी, 27 जून 2025:
ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में अनुदान योजनाओं को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। लेबर सरकार द्वारा घोषित 37 मिलियन डॉलर के 'Electorate Fund' कार्यक्रम को लेकर यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिरकार इन योजनाओं की सूची किसने तैयार की।

सरकार की इस योजना के तहत हर फेडरल सीट पर $400,000 खर्च किए जाने की बात कही गई है। लेबर पार्टी ने दावा किया है कि यह योजना पारंपरिक "पॉर्क बैरलिंग" (मतदान से पहले राजनीतिक लाभ के लिए अनुदान बांटने) से हटकर है और इसका उद्देश्य पारदर्शी तरीके से स्थानीय परियोजनाओं को वित्त देना है।

लेकिन विपक्ष और कई सामुदायिक समूहों का कहना है कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में जिन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई, वे चयन प्रक्रिया और जनहित के मानकों पर खरी नहीं उतरतीं।

कुछ क्षेत्रों में आरोप लगे हैं कि स्थानीय सांसदों को भी यह नहीं बताया गया कि उनकी सीट पर किस परियोजना को कैसे और क्यों चुना गया। एक स्वतंत्र जांच की मांग उठ रही है ताकि यह सामने आ सके कि यह सूची किन लोगों ने, किन मानदंडों के आधार पर तैयार की।

क्या कह रही है सरकार?
लेबर सरकार का कहना है कि यह स्कीम एक निष्पक्ष प्रक्रिया से गुजरी और इसका उद्देश्य सभी क्षेत्रों में समान विकास सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री दोनों ने यह साफ किया है कि योजना "वोट-बैंक" आधारित नहीं है, बल्कि यह समुदायों की आवश्यकताओं के आधार पर बनाई गई है।

राजनीतिक आलोचना और पारदर्शिता की मांग
हालांकि विपक्षी पार्टियाँ, खासकर लिबरल और नेशनल, इस स्कीम को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। वे मांग कर रहे हैं कि सरकार यह स्पष्ट करे कि परियोजनाओं की सूची किसने तैयार की और स्थानीय प्रतिनिधियों या समुदाय की राय इसमें कैसे शामिल की गई।

जनता और मीडिया की बढ़ती जिज्ञासा के बीच यह मामला पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के उपयोग के सवालों को लेकर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है।