टिकटॉक का नया ट्रेंड: मज़ाक के नाम पर अपमान, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

टिकटॉक का नया ट्रेंड: मज़ाक के नाम पर अपमान, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

टिकटॉक पर उभर रहे एक नए ट्रेंड ने अभिभावकों और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है, जिसमें किशोर आपसी ‘मज़ाक’ के नाम पर दूसरों को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने में जुटे हैं। यह ट्रेंड युवाओं के बीच तेजी से फैल रहा है और विशेषज्ञ इसे “सोशल ह्यूमिलिएशन”—यानी सामाजिक अपमान—का नया रूप बता रहे हैं।

क्या है ‘फ्लिप द कैमरा’ चुनौती?

इस चुनौती में एक समूह नाचते हुए किसी अनजान व्यक्ति को अपना मोबाइल कैमरा पकड़ने के लिए देता है। शुरू में सब सामान्य लगता है, लेकिन कुछ ही क्षणों बाद अचानक कोई कैमरा पलट देता है और तुरंत उस व्यक्ति का हावभाव रिकॉर्ड कर लेता है। बाद में यह वीडियो टिकटॉक पर पोस्ट किया जाता है और दर्शक उस व्यक्ति की भोली प्रतिक्रिया पर हंसते हैं।

कई उपयोगकर्ताओं ने इस ट्रेंड की आलोचना करते हुए इसे सीधा-सीधा ऑनलाइन बुलिंग बताया है। उनका कहना है कि इस "मज़ाक" का शिकार अक्सर वही होते हैं जो शांत स्वभाव के, अंतर्मुखी या मदद करने वाले बच्चे होते हैं।

क्रिएटर्स भी भावुक होकर बोले—“ये मज़ाक नहीं, अपमान है”

पिछले साल चर्चित हुए ‘वेरी डेम्योर’ ट्रेंड की निर्माता जूल्स लेब्रॉन ने इस चुनौती के खिलाफ भावुक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने कहा,
“फ्लिप द कैमरा ट्रेंड में मैं सिर्फ उन लोगों के चेहरे देखती हूं जो मदद करने के लिए आगे आते हैं… और फिर वही उपहास का केंद्र बन जाते हैं।”

अन्य क्रिएटर्स ने इसे टिकटॉक का अब तक का सबसे अपमानजनक ट्रेंड करार दिया है।

अभिभावक भी सख्त, बच्चों को दी चेतावनी

अमेरिका की एक मां का वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपने दो बच्चों को सख्त लहजे में समझाती दिखती हैं कि यदि वे इस ट्रेंड में शामिल हुए तो परिणाम गंभीर होंगे।

ऑनलाइन बुलिंग बदल रहा रूप: विशेषज्ञ

ऑस्ट्रेलियाई संगठन बुली ज़ीरो की सीईओ जेनेट ग्रिमा ने इसे बेहद चिंताजनक बताया। उनके अनुसार,
“हंसी-मज़ाक तब तक ठीक है जब तक उसमें किसी की बेइज्जती ना हो। लेकिन यहां मज़ाक की आड़ में किसी मासूम को शर्मिंदा करके वायरल किया जा रहा है, जो कि सीधा बुलिंग है।”

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया एल्गोरिदम अक्सर उन्हीं वीडियो को बढ़ावा देते हैं जिन पर लोग ज्यादा प्रतिक्रिया देते हैं—और यही वजह है कि अपमानजनक सामग्री भी आसानी से वायरल हो जाती है।

युवाओं में सहानुभूति की कमी चिंता का विषय

ग्रिमा के अनुसार, बच्चों को यह समझाने की जरूरत है कि ऑनलाइन किसी की सहमति (कन्सेंट) के बिना वीडियो बनाना या पोस्ट करना गलत है और उससे वास्तविक भावनात्मक नुकसान हो सकता है।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की—
“बच्चों को सिखाएं कि वे किसी वीडियो में शामिल होने से मना कर सकते हैं। यदि उन्हें कोई ज़बरदस्ती फोन पकड़ाता है, तो वे साफ़ ना कहें।”

ऐसे करें मदद: विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

  • ऐसे वीडियो लाइक, कमेंट या शेयर न करें।

  • इस तरह की सामग्री टिकटॉक की बुलिंग और उत्पीड़न से जुड़ी नीतियों का उल्लंघन करती है—इसलिए इसे तुरंत रिपोर्ट करें।

  • बच्चों को सहानुभूति, ऑनलाइन आचरण और डिजिटल जिम्मेदारी सिखाना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेंड चाहे जितना भी आकर्षक लगे, लेकिन किसी की भावनाओं को आहत करके मज़ाक बनाना कभी स्वीकार्य नहीं हो सकता।