अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को वॉशिंगटन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि ईरान अब परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अमेरिका ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश नहीं करेगा। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है तो वहां अराजकता फैल सकती है, जो पूरे क्षेत्र के लिए घातक साबित होगा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि चीन अब ईरान से तेल खरीद सकता है, लेकिन वह चाहेंगे कि चीन अमेरिका से भी तेल खरीदे। उन्होंने इस बयान के जरिए स्पष्ट संकेत दिया कि अमेरिका ईरान पर रणनीतिक दृष्टिकोण से नियंत्रण बनाए रखने की योजना में है, लेकिन सैन्य हस्तक्षेप से बचना चाहता है।
इजरायल और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव को लेकर ट्रंप ने तीखी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा,
"मैंने देखा कि जैसे ही हमने समझौता किया, इजरायल ने सबसे बड़ा हमला कर दिया। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। मैं ईरान से भी खुश नहीं हूं। उन्हें 12 घंटे दिए थे, लेकिन सब एक घंटे में ही खत्म कर दिया।"
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि दोनों देशों की कार्रवाइयां उस युद्धविराम को तोड़ सकती हैं, जिसे बहुत मुश्किल से लागू किया गया था। उन्होंने कहा,
"यह हास्यास्पद है। इन लोगों को शांत होना होगा। ये इतने वर्षों से लड़ रहे हैं कि अब खुद नहीं जानते कि कर क्या रहे हैं।"
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ’ पर भी इजरायल को कड़े शब्दों में फटकार लगाई। उन्होंने पोस्ट में लिखा:
“इजरायल, बम मत गिराओ। अगर ऐसा करते हो, तो यह बड़ा उल्लंघन होगा। अपने पायलट्स को तुरंत वापस बुलाओ – अभी!”
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञ इसे ट्रंप की नई विदेश नीति रणनीति के रूप में देख रहे हैं, जहां वे शक्ति प्रदर्शन की बजाय मध्यस्थता की भूमिका में दिखना चाहते हैं।
ट्रंप का यह स्पष्ट संकेत है कि 2025 में उनका प्रशासन युद्ध से अधिक स्थायित्व और रणनीतिक दबाव के जरिए नीतिगत जीत को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, इजरायल और ईरान की ओर से इस बयान पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।