नस्लवादी तस्वीर को लेकर ट्रंप की पोस्ट पर भारी विवाद, आलोचना के बाद हटाना पड़ा संदेश

नस्लवादी तस्वीर को लेकर ट्रंप की पोस्ट पर भारी विवाद, आलोचना के बाद हटाना पड़ा संदेश

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर नस्लवाद से जुड़े गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर साझा की गई एक आपत्तिजनक पोस्ट में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा को बंदरों (एप्स) के रूप में दर्शाया गया था। पोस्ट सामने आते ही देश-विदेश में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और इसे “खुले तौर पर नस्लवादी” करार दिया गया।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया जब राष्ट्रपति ट्रंप गुरुवार को वॉशिंगटन में आयोजित नेशनल प्रेयर ब्रेकफ़ास्ट कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे। कार्यक्रम के दौरान बाहर इस पोस्ट को लेकर राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया।

पोस्ट को लेकर नागरिक अधिकार संगठनों, डेमोक्रेट नेताओं के साथ-साथ रिपब्लिकन पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी कड़ी आपत्ति जताई। दक्षिण कैरोलाइना से रिपब्लिकन सीनेटर टिम स्कॉट, जो अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय से आते हैं, ने कहा कि वह “प्रार्थना कर रहे थे कि यह पोस्ट फर्जी हो।” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की भाषा और चित्रण किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हैं।

आलोचना केवल विपक्ष तक सीमित नहीं रही। ट्रंप के कई सहयोगियों ने निजी और सार्वजनिक रूप से इसे राजनीतिक रूप से नुकसानदेह और नैतिक रूप से गलत बताया। सोशल मीडिया पर लाखों यूज़र्स ने इस पोस्ट की निंदा करते हुए राष्ट्रपति से माफ़ी की मांग की।

लगातार बढ़ते दबाव के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने वह पोस्ट हटा ली। इसे उनके कार्यकाल के दौरान एक “दुर्लभ बैकडाउन” के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, पोस्ट हटाए जाने के बावजूद व्हाइट हाउस की ओर से अब तक कोई औपचारिक माफ़ीनामा या स्पष्ट सफ़ाई जारी नहीं की गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद अमेरिका में नस्लीय मुद्दों को लेकर चल रही बहस को और तेज़ कर सकता है। साथ ही, यह घटना राष्ट्रपति की सार्वजनिक भाषा और सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नए सिरे से सवाल खड़े करती है।