वॉशिंगटन/नई दिल्ली। प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ इयान ब्रेमर ने कहा है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसी नहीं है। ब्रेमर के अनुसार, यही कारण है कि ट्रंप के कई बड़े और विवादास्पद फैसले भविष्य में बदले या पलटे जा सकते हैं।
ब्रेमर ने एक साक्षात्कार में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को भारत में व्यापक जनसमर्थन और मजबूत राजनीतिक आधार प्राप्त है, जबकि ट्रंप का समर्थन अमेरिका में अधिक ध्रुवीकृत (polarized) रहा है। ऐसे में ट्रंप के कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसले लंबे समय तक टिके रहें, यह आवश्यक नहीं।
ब्रेमर का मानना है कि अमेरिका में सत्ता परिवर्तन की स्थिति में ट्रंप प्रशासन के कई फैसलों की दोबारा समीक्षा हो सकती है, खासकर विदेश नीति से जुड़े मामलों में। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनस्वीकृति किसी भी नीति की स्थिरता के लिए सबसे अहम होती है।
इसी बीच अमेरिका की कार्रवाई में निकोलस मादुरो को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अमेरिका द्वारा मादुरो के खिलाफ उठाए गए कदमों को लेकर कई देशों ने आपत्ति जताई है और इसे एक संप्रभु राष्ट्र के आंतरिक मामलों में दखल बताया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ट्रंप की आक्रामक नीति भविष्य में अमेरिका के लिए कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर सकती है, और सत्ता परिवर्तन होने पर इन फैसलों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इयान ब्रेमर के मुताबिक, ट्रंप और मोदी की लोकप्रियता की तुलना यह स्पष्ट करती है कि मजबूत जनसमर्थन ही किसी नेता की नीतियों को दीर्घकालिक बनाता है। जहां मोदी की लोकप्रियता उन्हें स्थिर नेतृत्व प्रदान करती है, वहीं ट्रंप के फैसले राजनीतिक अस्थिरता के कारण बदलाव के दायरे में बने रहते हैं।