ट्रंप-जेलेंस्की बैठक: शांति, सुरक्षा गारंटी और 100 अरब डॉलर की डील

ट्रंप-जेलेंस्की बैठक: शांति, सुरक्षा गारंटी और 100 अरब डॉलर की डील

वॉशिंगटन/कीव। यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में सोमवार को अहम प्रगति दर्ज की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच व्हाइट हाउस में लगभग 45 मिनट तक चली बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी।


शांति वार्ता पर जोर

जेलेंस्की ने बातचीत के दौरान स्पष्ट कहा कि यूक्रेन में स्थायी शांति तभी संभव है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधी वार्ता हो। ट्रंप ने इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि पुतिन युद्ध नहीं चाहते और जल्द ही त्रिपक्षीय वार्ता (ट्रंप-पुतिन-जेलेंस्की) संभव है। ट्रंप ने अपने पूर्ववर्ती जो बाइडन को युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें "भ्रष्ट" बताया।


यूरोपीय नेताओं की मौजूदगी

बैठक के दौरान व्हाइट हाउस में यूरोप के बड़े नेताओं की भी उपस्थिति रही। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर, इटली की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी, फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब, यूरोपीय संघ प्रमुख उर्सला वॉन डेर लेयेन और नाटो महासचिव मार्क रुट पास ही एक कक्ष में मौजूद रहे। उन्हें लगातार वार्ता की जानकारी दी जाती रही।


सुरक्षा गारंटी और कैदी रिहाई का वादा

ट्रंप ने यूरोपीय प्रस्ताव का समर्थन करते हुए यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि उम्मीद है, त्रिपक्षीय बैठक के तुरंत बाद रूस एक हजार से ज्यादा यूक्रेनी कैदियों को रिहा करेगा।


हथियारों की ऐतिहासिक डील

बैठक का एक बड़ा नतीजा यह भी रहा कि यूक्रेन ने अमेरिका से 100 अरब डॉलर मूल्य के हथियारों की खरीद पर सहमति जताई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह डील युद्ध में यूक्रेन की सैन्य क्षमता को और मजबूत करेगी।


माहौल रहा सकारात्मक

फरवरी में ओवल ऑफिस में हुई गरमागरम बहस और तनातनी के विपरीत इस बार बातचीत सौहार्दपूर्ण रही। दोनों नेताओं को कई बार मुस्कुराते और हंसते देखा गया। बैठक के बाद जेलेंस्की ने कहा कि यह वार्ता बेहद सकारात्मक रही और अब यूक्रेन को अमेरिका तथा यूरोप का मजबूत समर्थन मिल रहा है।


👉 यह मुलाकात न केवल युद्धविराम की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है बल्कि आने वाले दिनों में संभावित त्रिपक्षीय शांति वार्ता के लिए भी रास्ता खोलती है।