वाशिंगटन/कैनबरा: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी वस्तुओं पर लागू बेसलाइन टैरिफ को दोगुना करने की घोषणा की है, जिससे ऑस्ट्रेलिया सहित वैश्विक व्यापार पर व्यापक असर पड़ सकता है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि नई दरें 15% से 20% के बीच हो सकती हैं।
यह बयान ट्रंप ने स्कॉटलैंड में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ बातचीत के दौरान दिया। ट्रंप ने कहा, “हम बाकी दुनिया के लिए एक सामान्य टैरिफ तय करेंगे। आप 200 अलग-अलग सौदे नहीं कर सकते।”
फिलहाल अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश उत्पादों पर 10 प्रतिशत का बेसलाइन टैरिफ लगाता है, जबकि दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement - FTA) भी है। इसके अतिरिक्त, इस बेसलाइन टैक्स के ऊपर स्टील और एल्युमिनियम जैसी विशिष्ट इंडस्ट्री पर अलग से सेक्टोरल शुल्क भी लगाया जाता है।
ऑस्ट्रेलिया की अल्बानी सरकार ने ट्रंप की इस धमकी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। व्यापार मंत्री डॉन फैरेल के प्रवक्ता ने कहा, “ऑस्ट्रेलियाई सामानों पर कोई भी अतिरिक्त टैरिफ अनुचित है और यह अमेरिका के लिए आर्थिक आत्म-घात होगा। हम अमेरिकी प्रशासन से हर स्तर पर बातचीत करते रहेंगे।”
ऑस्ट्रेलिया के सह-कोषाध्यक्ष डैन मुलिनो ने ट्रंप की टिप्पणी को “तत्काल की गई प्रतिक्रिया” बताया। स्काई न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा, “ऑस्ट्रेलिया एक व्यापार-आधारित अर्थव्यवस्था है। हमारे लाखों नौकरियाँ निर्यात पर निर्भर हैं। हम नहीं चाहते कि दुनिया फिर से टैरिफ की दीवारों में बंटे।”
विपक्ष के व्यापार प्रवक्ता केविन होगन ने भी ट्रंप की योजना की आलोचना करते हुए कहा, “यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद नुकसानदायक कदम होगा। इससे अन्य देश भी जवाबी टैरिफ लगा सकते हैं, और यह व्यापार युद्ध की दिशा में पहला कदम होगा।”
विशेषज्ञों और विपक्ष की मांग है कि प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ को अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप से सीधे मुलाकात करनी चाहिए और ऑस्ट्रेलिया के हितों की रक्षा के लिए बात करनी चाहिए।
इस नई टैरिफ नीति से स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन अपनी "अमेरिका फर्स्ट" नीति को और कठोर बना रहा है, जिसका असर ऑस्ट्रेलिया जैसे मित्र देशों पर भी पड़ सकता है।