डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित की गई नई व्यापार नीति से ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। ट्रंप की योजना के अनुसार, दवाइयों और तांबे पर आयात शुल्क (टैरिफ) में भारी बढ़ोतरी की जाएगी, जिससे ऑस्ट्रेलिया की दवा उद्योग को लगभग 3 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का नुकसान होने की आशंका है।
यह फैसला ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" नीति का हिस्सा है, जिसमें वे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के नाम पर विदेशी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इस कदम से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया प्रमुख है, जहां दवा उद्योग पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
सरकारी अधिकारियों और व्यापारिक संगठनों ने इस फैसले को "चिंताजनक और नुकसानदायक" बताया है। उनका कहना है कि अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों में इतनी बड़ी बाधा आने से ऑस्ट्रेलिया की दवा कंपनियों को अपना माल निर्यात करना कठिन हो जाएगा। इससे न केवल राजस्व में गिरावट आएगी, बल्कि हजारों नौकरियों पर भी खतरा मंडरा सकता है।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया,
"हम अमेरिका के साथ खुला और स्थिर व्यापार चाहते हैं, लेकिन इस तरह के टैरिफ हमारे औद्योगिक ढांचे को कमजोर कर सकते हैं। हम इस मुद्दे पर राजनयिक स्तर पर बातचीत कर रहे हैं।"
ऑस्ट्रेलिया में दवा उद्योग करीब 50,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है। अमेरिका इस उद्योग के लिए एक बड़ा निर्यात बाजार है। यदि ट्रंप की यह नीति लागू होती है, तो न केवल दवाओं की कीमतें बढ़ेंगी, बल्कि कुछ आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति भी बाधित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय वैश्विक फार्मा आपूर्ति शृंखला पर भी असर डालेगा।
ऑस्ट्रेलियन फार्मास्युटिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा,
"यह सिर्फ व्यापार का मसला नहीं है, यह जनस्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। अगर दवाओं की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ेगा।"
ऑस्ट्रेलिया की विपक्षी पार्टियों ने भी सरकार से मांग की है कि वह ट्रंप की इस नीति के खिलाफ सख्त रुख अपनाए और अमेरिका के साथ द्विपक्षीय वार्ता को तेज करे।