ब्रिटेन में सोशल मीडिया पर सख्ती: बच्चों के लिए अनंत स्क्रॉलिंग पर रोक की तैयारी

प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर बोले—“किसी भी प्लेटफॉर्म को नहीं मिलेगी खुली छूट”

ब्रिटेन में सोशल मीडिया पर सख्ती: बच्चों के लिए अनंत स्क्रॉलिंग पर रोक की तैयारी

लंदन। ब्रिटेन की सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों पर कड़ा शिकंजा कसने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री Keir Starmer ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “किसी भी प्लेटफॉर्म को अब फ्री पास नहीं मिलेगा।” सरकार बच्चों और किशोरों को सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए ‘एंडलेस स्क्रॉलिंग’ (अनंत स्क्रॉलिंग) जैसी सुविधाओं पर रोक लगाने और एल्गोरिदमिक कंटेंट की सख्त निगरानी की तैयारी कर रही है।

बच्चों की सुरक्षा पर जोर

सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन से बांधे रखने के लिए ऐसे फीचर इस्तेमाल करते हैं, जो उनकी मानसिक सेहत पर नकारात्मक असर डालते हैं। अनंत स्क्रॉलिंग, ऑटो-प्ले वीडियो और लगातार नोटिफिकेशन जैसी सुविधाएं बच्चों में लत पैदा करती हैं।

नई नीति के तहत कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 18 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए ऐसे फीचर्स सीमित या बंद किए जाएं। इसके साथ ही आयु सत्यापन (एज वेरिफिकेशन) की प्रक्रिया को भी सख्त किया जाएगा।

कंपनियों के लिए कड़े नियम

सरकार ने संकेत दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वाली टेक कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। नियामक संस्थाएं यह भी देखेंगी कि प्लेटफॉर्म बच्चों को किस तरह का कंटेंट दिखा रहे हैं और वह कितना सुरक्षित है।

प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा कि टेक कंपनियों को मुनाफे से पहले बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाएगी।

अभिभावकों और विशेषज्ञों का समर्थन

बाल अधिकार संगठनों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से सोशल मीडिया के हानिकारक प्रभावों पर चिंता जताई जा रही थी।

हालांकि, कुछ टेक कंपनियों का तर्क है कि अत्यधिक सख्ती से नवाचार प्रभावित हो सकता है। फिर भी सरकार का रुख साफ है—बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।

ब्रिटेन का यह कदम वैश्विक स्तर पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि कई देश सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति सफल रहती है तो अन्य राष्ट्र भी इसी तरह के कड़े नियम लागू कर सकते हैं।