वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के संबंधों में हाल के समय में हल्की खटास देखने को मिल रही है। एक अमेरिकी थिंक टैंक की ताज़ा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि पाकिस्तान से संचालित आतंकवाद के खिलाफ पर्याप्त कदम न उठाने को लेकर भारत में असंतोष बढ़ रहा है, जिसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ रहा है।
Center for a New American Security द्वारा जारी रिपोर्ट ‘रिपेयरिंग द ब्रीच: गेटिंग यूएस-इंडिया टाइज बैक ऑन ट्रैक’ में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रहने के बावजूद रणनीतिक स्तर पर अविश्वास अब भी बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा पाकिस्तान आधारित आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं को गंभीरता से न लेना नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय है।
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि अमेरिका को कश्मीर मुद्दे पर भारत की संवेदनशीलता और उसकी ‘रेड लाइन्स’ का सम्मान करना चाहिए तथा किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से बचना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 में भारत-अमेरिका संबंधों में आई गिरावट के प्रभाव अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। उस दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम को लेकर मतभेद और अमेरिकी द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए भारी टैरिफ जैसे मुद्दों ने रिश्तों को प्रभावित किया था।
रिपोर्ट की लेखिकाओं — लिसा कर्टिस, कीर्ति मार्टिन और सितारा गुप्ता — के अनुसार, दोनों देशों के संबंधों को पटरी पर लाने के लिए विश्वास बहाली के प्रयासों की आवश्यकता है। हालांकि रक्षा, तकनीक और आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग जारी है, लेकिन आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्ट और ठोस रुख अपनाना जरूरी माना जा रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि अमेरिका भारत की सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता देता है, तो दोनों देशों के संबंध और मजबूत हो सकते हैं। वहीं, इस मुद्दे पर उदासीनता बनी रहने पर रणनीतिक साझेदारी पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।