वॉशिंगटन/ब्रसेल्स।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं, लेकिन अब पश्चिमी देशों की नीतियों और विशेषकर यूक्रेन के भविष्य पर उनकी पकड़ पहले जैसी मज़बूत नहीं रही है। यूरोप, जो लंबे समय तक अमेरिका की सुरक्षा छतरी पर निर्भर रहा, अब अपने सैन्य ढांचे को मज़बूत करने और स्वतंत्र रणनीति अपनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
नाटो सदस्य देश और यूरोपीय संघ अब अपने रक्षा बजट को बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक हथियारों में निवेश कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध ने यूरोपीय देशों को यह समझा दिया है कि केवल अमेरिका पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसीलिए जर्मनी, फ्रांस और पोलैंड जैसे देश बड़े पैमाने पर हथियार खरीद और उत्पादन को बढ़ा रहे हैं।
ट्रंप की बयानबाज़ी और रोज़ाना की सुर्खियों के बावजूद, यूरोप अब अमेरिकी राजनीतिक अस्थिरता से खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश में है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका की घरेलू राजनीति और ट्रंप की प्राथमिकताओं ने पश्चिमी सहयोगियों का भरोसा हिला दिया है। यही वजह है कि अब यूरोप अपने दम पर सामरिक संतुलन बनाने के प्रयास कर रहा है।
यूक्रेन को लेकर भी यूरोप का झुकाव पहले से अधिक सक्रिय और निर्णायक होता दिख रहा है। जबकि अमेरिका की भूमिका सीमित होती जा रही है, यूरोप अब यूक्रेन की सुरक्षा और पुनर्निर्माण में अधिक निवेश और जिम्मेदारी लेने को तैयार है।
👉 साफ है कि आने वाले समय में पश्चिमी सुरक्षा ढांचे में यूरोप की भूमिका और भी अहम होगी, जबकि अमेरिका की पकड़ धीरे-धीरे ढीली होती दिखाई दे रही है।