गाज़ा में जारी युद्ध को लेकर इज़राइल की नीतियों पर ऑस्ट्रेलिया में असंतोष गहराता जा रहा है। देश के प्रमुख श्रमिक संघों (यूनियनों) के भीतर इस मुद्दे पर खुला टकराव सामने आया है। कई यूनियन संगठनों ने इज़राइल की सैन्य कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए इसे मानवाधिकारों के खिलाफ बताया है, जबकि कुछ अन्य संगठनों ने इस तरह के सार्वजनिक विरोध से दूरी बनाए रखने की कोशिश की है।
इसी बीच, कट्टरपंथी इज़राइल-विरोधी और फ़िलिस्तीन समर्थक समूहों ने 11 जनवरी को बड़े पैमाने पर सड़क प्रदर्शन करने की घोषणा की है। यह प्रदर्शन बॉन्डी क्षेत्र में हाल में हुई घटनाओं के बाद आयोजित किया जाने वाला पहला बड़ा जन आंदोलन माना जा रहा है। आयोजकों का दावा है कि यह विरोध गाज़ा में आम नागरिकों पर हो रही कथित हिंसा के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने के लिए किया जा रहा है।
यूनियन हलकों में इस मुद्दे को लेकर गहरी फूट देखी जा रही है। कुछ श्रमिक नेताओं का कहना है कि यूनियनों को अंतरराष्ट्रीय राजनीति से दूर रहकर श्रमिक अधिकारों पर ध्यान देना चाहिए, जबकि अन्य नेताओं का मानना है कि मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में चुप रहना नैतिक रूप से गलत है।
सरकारी और सुरक्षा एजेंसियां आगामी प्रदर्शनों को लेकर सतर्क हो गई हैं। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी जाएगी, लेकिन हिंसा, नफरत फैलाने वाले नारों या किसी भी तरह की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था को पहले ही कड़ा कर दिया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गाज़ा युद्ध का असर अब केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने घरेलू राजनीति, श्रमिक संगठनों और सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक बहस और विरोध प्रदर्शनों का कारण बन सकता है।