सिडनी, 4 अगस्त: न्यू साउथ वेल्स की स्वतंत्र भ्रष्टाचार निरोधक संस्था (ICAC) द्वारा पिछले महीने पारामट्टा काउंसिल स्टाफ कार्यालयों पर की गई छापेमारी को लेकर अब नए सवाल उठने लगे हैं। इस कार्रवाई के बाद काउंसिल के कुछ पार्षदों ने अपने कानूनी दायित्वों को लेकर स्वतंत्र कानूनी सलाह की मांग की है।
क्या है मामला?
सूत्रों के अनुसार, ICAC की यह छापेमारी एक कथित भ्रष्टाचार के मामले की जांच के तहत की गई थी, जिसमें कुछ आंतरिक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए। हालांकि, इस छापे की आधिकारिक पुष्टि और विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इस गोपनीयता ने ही मामले को और रहस्यमय बना दिया है।
पार्षदों में असमंजस
छापेमारी के बाद पारामट्टा सिटी काउंसिल के कुछ निर्वाचित प्रतिनिधियों ने खुलकर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि उन्हें न तो इस कार्रवाई की पूर्व जानकारी दी गई, न ही यह बताया गया कि उनके व्यक्तिगत या प्रशासनिक कर्तव्यों पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है।
एक पार्षद ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "हमें नहीं पता कि हमसे क्या अपेक्षा की जा रही है। यदि कोई संवेदनशील जानकारी की मांग होती है, तो हमें यह जानने का अधिकार है कि हम कानून के तहत कितनी जानकारी साझा कर सकते हैं।"
स्वतंत्र कानूनी सलाह की मांग
इन परिस्थितियों को देखते हुए, कई पार्षदों ने अब स्वतंत्र कानूनी सलाह लेने का प्रस्ताव रखा है। वे चाहते हैं कि किसी बाहरी विशेषज्ञ से सलाह लेकर यह स्पष्ट किया जाए कि इस मामले में उनकी कानूनी स्थिति क्या है और वे किस हद तक जवाबदेह हैं।
काउंसिल की प्रतिक्रिया
पारामट्टा सिटी काउंसिल की ओर से एक संक्षिप्त बयान जारी करते हुए कहा गया है कि वे ICAC की जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं दी जा सकती क्योंकि मामला जांचाधीन है।
आगे की राह
यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में ICAC की ओर से क्या खुलासे होते हैं और काउंसिल इस स्थिति से कैसे निपटती है। फिलहाल पारामट्टा की स्थानीय राजनीति और प्रशासन में यह मामला गर्म चर्चा का विषय बना हुआ है।