विजय माल्या की भारत वापसी पर अनिश्चितता, बॉम्बे हाई कोर्ट ने मांगा विस्तृत हलफनामा

विजय माल्या की भारत वापसी पर अनिश्चितता, बॉम्बे हाई कोर्ट ने मांगा विस्तृत हलफनामा

नई दिल्ली/मुंबई। भगोड़े कारोबारी Vijay Mallya की भारत वापसी को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। बुधवार को Bombay High Court में सुनवाई के दौरान माल्या की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने अदालत को बताया कि यूनाइटेड किंगडम में लागू कानूनी पाबंदियों के चलते वह भारत लौटने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं दे सकते।

अदालत को बताया गया कि यूके की अदालतों के आदेशों के तहत माल्या को इंग्लैंड और वेल्स छोड़ने, विदेश यात्रा करने या अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज के लिए आवेदन करने पर रोक है। इन प्रतिबंधों के कारण उनके लिए भारत वापसी की तारीख तय करना संभव नहीं है।

अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई की मांग

माल्या के वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि उनकी दोनों याचिकाओं पर अलग-अलग सुनवाई की जाए, भले ही वह शारीरिक रूप से भारत में उपस्थित न हो सकें। उन्होंने दलील दी कि सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों में याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति के बावजूद संवैधानिक अदालतों ने मामलों की सुनवाई की है।

हालांकि, पीठ ने इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल यूके की अदालतों के आदेशों का हवाला देना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने पूछा कि क्या इन आदेशों को चुनौती दी गई है या यात्रा की अनुमति के लिए कोई प्रयास किया गया है।

फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट पर चुनौती

माल्या ने Fugitive Economic Offenders Act के प्रावधानों को चुनौती दी है। इससे पहले हाई कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि जब तक माल्या भारत लौटकर अदालत के अधिकार क्षेत्र में उपस्थित नहीं होते, तब तक उनकी याचिका पर सुनवाई संभव नहीं होगी।

अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति भगोड़ा घोषित होने के बाद भारतीय कानून की पहुंच से बाहर रहकर राहत की मांग नहीं कर सकता।

विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

पीठ ने माल्या को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें यूके की अदालतों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की प्रकृति, उन आदेशों को चुनौती देने की स्थिति और भारत लौटने के संबंध में उनका स्पष्ट रुख बताना होगा।

मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि माल्या अदालत के समक्ष क्या रुख अपनाते हैं और क्या उनकी भारत वापसी को लेकर कोई ठोस प्रगति होती है।