ब्रिटनी हिगिंस पर WA सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

ब्रिटनी हिगिंस पर WA सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

“26 झूठे और भ्रामक बयान दिए, राजनीतिक कवर-अप का दावा गलत”

पर्थ, ऑस्ट्रेलिया – पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की सुप्रीम कोर्ट ने चर्चित राजनीतिक कांड में नया मोड़ देते हुए पूर्व संसदीय कर्मचारी ब्रिटनी हिगिंस को आड़े हाथों लिया है। कोर्ट ने कहा कि हिगिंस ने मीडिया को दिए अपने इंटरव्यू में 26 झूठे और भ्रामक बयान दिए, जिनका मकसद अपने नियोक्ताओं पर दबाव बनाना और राजनीतिक कवर-अप की कहानी गढ़ना था।


मानहानि का मुकदमा और अदालत का फैसला

पूर्व रक्षा मंत्री और लिबरल पार्टी की वरिष्ठ नेता लिंडा रेनॉल्ड्स ने हिगिंस और उनके पति डेविड शाराज़ पर मानहानि का केस दायर किया था। दोनों ने सोशल मीडिया पर रेनॉल्ड्स और उनकी टीम पर यौन उत्पीड़न मामले को दबाने का आरोप लगाया था।

बुधवार को जस्टिस पॉल टॉटल ने इस मामले में रेनॉल्ड्स के पक्ष में निर्णय सुनाया और उन्हें 3.41 लाख डॉलर (लगभग 1.8 करोड़ रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया।


जज की सख्त टिप्पणी

अपने फैसले में जस्टिस टॉटल ने कहा कि हिगिंस की कहानी का सबसे अहम हिस्सा – “कवर-अप” – तथ्यों पर आधारित नहीं था, बल्कि यह उनकी व्यक्तिगत धारणा और राजनीतिक आरोपों से प्रभावित था।

उन्होंने लिखा –
“यह साफ है कि हिगिंस का बयान घटनाओं को इस तरह तोड़-मरोड़कर पेश करता था कि वह खुद को पीड़िता और अपने पूर्व नियोक्ताओं को दोषी साबित कर सके। उन्होंने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया और ऐसे बयान दिए जिनकी कोई वास्तविक नींव नहीं थी।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि मीडिया इंटरव्यू कोई सामान्य बातचीत नहीं थी, बल्कि गंभीर मंच थे। नेटवर्क टेन ने हिगिंस से शपथपत्र पर हस्ताक्षर भी कराए थे, फिर भी उन्होंने झूठे बयान दिए।


मामला कैसे शुरू हुआ

  • 2019 में हिगिंस ने दावा किया कि उनके सहकर्मी ब्रूस लेहरमान ने संसद भवन में उनका यौन शोषण किया।

  • 2021 में उन्होंने news.com.au और The Project जैसे प्रमुख मीडिया मंचों पर यह आरोप सार्वजनिक किया।

  • इस खुलासे ने ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में भूचाल ला दिया।

  • लेहरमान के खिलाफ मामला अदालत तक पहुँचा, लेकिन जूरी में गड़बड़ी होने के कारण सुनवाई रद्द करनी पड़ी। बाद में अभियोजन पक्ष ने आरोप वापस ले लिए।

  • लेहरमान लगातार अपनी बेगुनाही का दावा करते रहे हैं।


राजनीतिक और सामाजिक असर

हिगिंस के आरोपों ने न सिर्फ संसद भवन और लिबरल पार्टी बल्कि पूरे ऑस्ट्रेलिया की राजनीति में हलचल मचा दी थी। महिलाओं की सुरक्षा और कार्यस्थल पर आचरण से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गए। लेकिन अब कोर्ट के इस ताज़ा फैसले ने हिगिंस की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।