कैनबरा, ऑस्ट्रेलिया — ऑस्ट्रेलिया में सम्पन्न हुए हालिया इकोनॉमिक समिट (आर्थिक शिखर सम्मेलन) के बाद संपत्ति कर (वेल्थ टैक्स) पर चर्चा तेज हो गई है। सरकार इस समय उत्पादकता सुधारों के लिए व्यापक सहमति बनाने की दिशा में काम कर रही है, और जानकारों का कहना है कि वेल्थ टैक्स ऐसा मुद्दा है जिस पर विभिन्न वर्गों में प्रारंभिक स्तर पर एकराय बनती दिख रही है।
शिखर सम्मेलन में अर्थशास्त्रियों, उद्योग प्रतिनिधियों, श्रमिक संगठनों और नीति-निर्माताओं ने आर्थिक वृद्धि को गति देने, कर-प्रणाली में सुधार और राजकोषीय संतुलन बनाए रखने के उपायों पर मंथन किया। एक बड़े वर्ग ने माना कि अमीर तबके पर अतिरिक्त कर का बोझ डालकर, सरकार राजस्व में बढ़ोतरी कर सकती है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे में निवेश संभव होगा।
समर्थन और विरोध दोनों मौजूद
सम्मेलन में शामिल कई विशेषज्ञों ने कहा कि वेल्थ टैक्स से सामाजिक असमानता में कमी आएगी और कर-प्रणाली अधिक न्यायपूर्ण बनेगी। उनका तर्क है कि वर्तमान प्रणाली में मध्यम और निम्न आय वर्ग पर अपेक्षाकृत अधिक बोझ है, जबकि बड़े पैमाने पर संपत्ति रखने वालों का योगदान सीमित है।
दूसरी ओर, कुछ बड़े कारोबारी संगठनों ने आशंका जताई कि इस तरह का कर निवेश के माहौल को ठंडा कर सकता है और पूंजी पलायन (कैपिटल फ्लाइट) का खतरा पैदा कर सकता है। उनका कहना है कि आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिए निवेश प्रोत्साहन की ज़रूरत है, न कि बाधाएं।
सरकार की अगली चाल
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, वेल्थ टैक्स पर अब विस्तृत परामर्श प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसमें उद्योग, विशेषज्ञ और आम नागरिकों से राय ली जाएगी। वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव के कानूनी और आर्थिक पहलुओं का अध्ययन कर रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनों में इस पर ठोस नीति का ऐलान हो सकता है।
वैश्विक संदर्भ
गौरतलब है कि वेल्थ टैक्स को लेकर दुनिया के कई देशों में बहस जारी है। यूरोप के कुछ देशों में यह लागू है, जबकि अमेरिका में भी इस पर चर्चा हो रही है। ऑस्ट्रेलिया में इसे लागू करने की संभावना इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार आर्थिक वृद्धि और कर-न्याय के बीच संतुलन कैसे साधती है।