नई दिल्ली, 15 जनवरी 2026 — ईरान पर अमेरिका के संभावित सैन्य हमले की अटकलों के बीच पाकिस्तान में चिंता का माहौल गहराता जा रहा है। इस आशंका का सबसे बड़ा असर पाकिस्तान के पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में देखा जा रहा है, जहां पहले से ही विद्रोह, अलगाववादी गतिविधियां और सुरक्षा चुनौतियां मौजूद हैं।
रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है या बाहरी सैन्य हस्तक्षेप के चलते वहां अस्थिरता फैलती है, तो उसका सीधा और गहरा प्रभाव पाकिस्तान पर पड़ेगा। सीमा पार उग्रवाद, हथियारों की तस्करी और बड़े पैमाने पर शरणार्थी संकट जैसी समस्याएं एक बार फिर सिर उठा सकती हैं।
पाकिस्तान के पूर्व राजदूत आसिफ दुर्रानी का कहना है कि ईरान में किसी भी तरह का राजनीतिक या सुरक्षा परिवर्तन, चाहे वह आंतरिक कारणों से हो या बाहरी दबाव के चलते, उसकी लहरें पाकिस्तान तक अवश्य पहुंचेंगी। उन्होंने विशेष रूप से ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत का ज़िक्र करते हुए कहा कि वहां के बलूच समुदाय के पाकिस्तान के बलूचिस्तान से गहरे जातीय और भाषाई रिश्ते हैं, जो स्थिति को और संवेदनशील बनाते हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, अगर ईरान में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, तो इसका फायदा बलूच विद्रोही नेटवर्क उठा सकते हैं। ये समूह पहले से ही पाकिस्तान-ईरान सीमा पर सक्रिय हैं और हालात बिगड़ने की स्थिति में उनकी गतिविधियों में तेजी आ सकती है, जिससे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं।
बलूचिस्तान पहले ही लंबे समय से हिंसा और विद्रोह से जूझ रहा है। यहां सक्रिय सशस्त्र समूह अक्सर सुरक्षा बलों और अहम आर्थिक परियोजनाओं, खासकर चीन-पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर (CPEC) को निशाना बनाते रहे हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर हालात और बिगड़े, तो इसका असर न सिर्फ सुरक्षा बल्कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता पर भी पड़ेगा।
इसके अलावा, एक और बड़ी चिंता संभावित शरणार्थी संकट को लेकर है। अगर ईरान में संघर्ष या अमेरिकी सैन्य कार्रवाई होती है, तो लाखों लोग पाकिस्तान की ओर रुख कर सकते हैं। पाकिस्तान पहले ही बड़ी संख्या में अफगान शरणार्थियों का बोझ उठा रहा है और नए संकट से निपटने के लिए वह पूरी तरह तैयार नहीं माना जाता।
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य-पूर्व में बढ़ती अस्थिरता का असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। ऐसे में पाकिस्तान को बेहद संतुलित और सतर्क कूटनीति अपनानी होगी, ताकि वह अमेरिका और ईरान दोनों के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाए रख सके और किसी बड़े आंतरिक संकट से बचा रह सके।