अमेरिका को क्यों खटकता है पुतिन का 'वफादार योद्धा'

अमेरिका को क्यों खटकता है पुतिन का 'वफादार योद्धा'

 रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर दुनियाभर में तनाव की स्थिति बनी हुई है, लेकिन इस बीच एक नाम ऐसा भी है जो अमेरिका और विशेषकर डोनाल्ड ट्रंप के लिए ‘कांटे’ की तरह चुभ रहा है – दमित्री मेदवेदेव। रूस के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा समय में रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष मेदवेदेव को आज रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का सबसे भरोसेमंद रणनीतिक सहयोगी माना जाता है।

मेदवेदेव बनाम ट्रंप: सोशल मीडिया पर जंग

हाल ही में ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए एक शांति प्रस्ताव की बात की थी, जिसे मेदवेदेव ने 'ड्रामा' कहकर खारिज कर दिया। उन्होंने ट्रंप के प्रस्ताव को न केवल अव्यावहारिक बताया, बल्कि तेज लहजे में जवाब देते हुए अमेरिका को धमकी तक दे डाली। इसके बाद ट्रंप ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए रूस को परमाणु पनडुब्बी की ताकत याद दिलाई।

कौन हैं दमित्री मेदवेदेव?

दमित्री मेदवेदेव का जन्म लेनिनग्राद (अब सेंट पीटर्सबर्ग) में हुआ था। एक वकील के रूप में प्रशिक्षित मेदवेदेव ने 1987 में कानून की डिग्री और 1990 में पीएचडी प्राप्त की थी। वह 1990 के दशक में व्लादिमीर पुतिन की शुरुआती टीम का हिस्सा बने और तभी से पुतिन के साथ उनके संबंध बेहद मजबूत बने रहे।

राष्ट्रपति पद तक का सफर: पुतिन की योजना का हिस्सा

साल 2008 में जब रूसी संविधान ने पुतिन को तीसरी बार लगातार राष्ट्रपति बनने से रोक दिया, तब मेदवेदेव को राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान पुतिन प्रधानमंत्री बने रहे और असल शक्ति उनके पास ही रही। 2012 में दोनों ने फिर से पदों की अदला-बदली की और पुतिन राष्ट्रपति बन गए जबकि मेदवेदेव प्रधानमंत्री।

उदार नेता से कट्टर राष्ट्रवादी तक

कभी एक उदारवादी और सुधारवादी नेता माने जाने वाले मेदवेदेव ने 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद कट्टर राष्ट्रवादी रुख अपनाया। वह लगातार परमाणु युद्ध की धमकियों, पश्चिमी देशों पर अपमानजनक टिप्पणियों, और अमेरिका-विरोधी बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह सब राजनीतिक मजबूती और रूसी सेना के कट्टर धड़े का समर्थन पाने के लिए किया जा रहा है।