भारतीय युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज़ के अंतिम और निर्णायक टेस्ट में एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया है, जो 148 साल के टेस्ट इतिहास में आज तक कोई नहीं कर सका था। केनिंग्टन ओवल में खेले जा रहे इस पांचवें टेस्ट के अंतिम दिन जायसवाल ने बेहद कठिन परिस्थितियों में 118 रन की शानदार पारी खेली, जिसने भारत की जीत की नींव रख दी।
जायसवाल का यह शतक टेस्ट इतिहास का 1526वां शतक था, लेकिन अपनी तरह का पहला और अनोखा। खास बात यह रही कि इस शतकीय पारी में जायसवाल ने अपने 100 में से 82 रन स्क्वायर साइड – यानी पॉइंट, थर्ड मैन और स्क्वायर लेग जैसे क्षेत्रों में बनाए। टेस्ट क्रिकेट के 148 वर्षों में यह पहला मौका है जब किसी बल्लेबाज ने स्क्वायर साइड से इतने रन बटोरे हों।
यह आंकड़ा न सिर्फ जायसवाल की तकनीकी परिपक्वता दिखाता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि इंग्लिश गेंदबाज उन्हें उस क्षेत्र में रन बनाने से रोकने में नाकाम रहे।
इस पारी से पहले जायसवाल लगातार आलोचनाओं का सामना कर रहे थे। पिछली कुछ पारियों में जल्दी आउट होने के कारण उन पर प्रदर्शन का दबाव था। लेकिन निर्णायक टेस्ट में इस शतक के जरिए उन्होंने न सिर्फ आलोचकों का मुंह बंद किया, बल्कि सीरीज में भारत की संभावित जीत में भी अहम भूमिका निभाई।
यशस्वी जायसवाल ने पूरी सीरीज में 5 टेस्ट की 10 पारियों में 41.10 की औसत से कुल 411 रन बनाए, जिसमें 2 शतक और 2 अर्द्धशतक शामिल हैं। वे भारत के लिए सीरीज में सर्वाधिक रन बनाने वाले पांचवें बल्लेबाज रहे।
यह पारी जायसवाल के इस इंग्लैंड दौरे की अंतिम पारी थी, और इसे वे निश्चित तौर पर सम्मानजनक विदाई मान सकते हैं। उनका यह प्रदर्शन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है कि दबाव में भी संयम और समझदारी से खेला गया क्रिकेट कितना निर्णायक साबित हो सकता है।