सिडनी, 10 जुलाई:
एक ऐतिहासिक रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ऑस्ट्रेलिया की युवा पीढ़ी में यहूदी-विरोधी (Antisemitism) विचार पहले से कहीं अधिक गहराई से जड़ें जमा चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यहूदी विरोध अब केवल एक व्यक्तिगत पूर्वाग्रह नहीं रहा, बल्कि यह देश की शिक्षण संस्थाओं — खासकर स्कूलों और विश्वविद्यालयों — में "सामान्यीकृत और प्रणालीगत" रूप ले चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार, "यहूदी-विरोध ऑस्ट्रेलियाई शैक्षिक प्रणाली में इस कदर समाहित हो चुका है कि छात्रों के व्यवहार, पाठ्यक्रम और सोशल मीडिया पर इसकी स्पष्ट झलक देखने को मिलती है।"
रिपोर्ट की मुख्य बातें:
युवा ऑस्ट्रेलियाई वयस्कों (खासकर 18 से 30 वर्ष के बीच) में यहूदी समुदाय के खिलाफ नकारात्मक धारणा रखने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
कई छात्र और शिक्षक यह मानते हैं कि इजराइल और यहूदी समुदाय की आलोचना करना 'सामाजिक रूप से स्वीकार्य' है, भले ही वह आलोचना नस्लभेदी या घृणा से प्रेरित हो।
सोशल मीडिया पर यहूदी विरोधी सामग्री का प्रसार तेज़ी से हो रहा है, जिससे युवाओं में पूर्वाग्रह और नफरत की भावना और गहरी हो रही है।
सरकारी प्रतिक्रिया:
ऑस्ट्रेलिया सरकार के यहूदी-विरोध के खिलाफ विशेष दूत ने इस रिपोर्ट को बेहद गंभीर बताते हुए कहा, "हमें अपने स्कूलों और विश्वविद्यालयों में नफरत और भेदभाव की मानसिकता को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।"
यह कदम उठाए जा सकते हैं:
शिक्षकों को नस्लवाद और यहूदी विरोध से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण देना।
स्कूल पाठ्यक्रम में विविधता, सहिष्णुता और यहूदी इतिहास को शामिल करना।
सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाली सामग्री के खिलाफ सख्त निगरानी और कार्रवाई।
यह रिपोर्ट यहूदी समुदाय के उन लोगों की पीड़ा को भी उजागर करती है, जिन्होंने कैंपस में भेदभाव, गाली-गलौज, और कभी-कभी शारीरिक हमलों तक का सामना किया है।
निष्कर्ष:
रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि ऑस्ट्रेलिया जैसे बहुसांस्कृतिक देश में यहूदी विरोध जैसी मानसिकता का बढ़ना केवल यहूदी समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज की एकता, शांति और समरसता के लिए खतरा है। सरकार, संस्थान और समाज को मिलकर इस दिशा में काम करने की आवश्यकता है।