नई दिल्ली। सोशल मीडिया की दुनिया में क्रांति लाने वाली कंपनी Meta Platforms एक बार फिर बड़े फैसले के कारण चर्चा में है। Facebook की पेरेंट कंपनी Meta ने अपने बहुचर्चित Metaverse प्रोजेक्ट से जुड़ी टीम के 1,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। यह फैसला न सिर्फ कंपनी की आंतरिक रणनीति में बदलाव को दर्शाता है, बल्कि उस सपने के टूटने का संकेत भी है, जिसे Meta के को-फाउंडर Mark Zuckerberg ने भविष्य की डिजिटल दुनिया बताया था।
साल 2021 में Facebook का नाम बदलकर Meta किया गया था। उस वक्त जकरबर्ग ने ऐलान किया था कि आने वाला दौर Metaverse का होगा—एक ऐसी वर्चुअल दुनिया, जहां लोग काम करेंगे, मिलेंगे, खेलेंगे और डिजिटल अवतार के ज़रिये जीवन जीएंगे।
इस विज़न को साकार करने के लिए Meta ने अपनी Reality Labs यूनिट के ज़रिये वर्चुअल रियलिटी (VR), ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और XR तकनीक पर अरबों डॉलर का निवेश किया।
लेकिन हकीकत यह रही कि भारी निवेश के बावजूद Metaverse को आम यूज़र्स और बिज़नेस जगत से वैसी स्वीकार्यता नहीं मिल सकी, जैसी उम्मीद की गई थी।
कंपनी के आंतरिक सूत्रों के मुताबिक, Metaverse से जुड़े प्रोजेक्ट्स लगातार घाटे में चल रहे थे। VR हेडसेट्स, Horizon Worlds और अन्य वर्चुअल प्लेटफॉर्म्स पर खर्च बढ़ता गया, लेकिन रिटर्न बेहद सीमित रहा।
Meta की Reality Labs डिवीजन ने पिछले कुछ वर्षों में दसियों अरब डॉलर का नुकसान दर्ज किया। इसी दबाव में कंपनी ने लगभग 10 प्रतिशत स्टाफ की छंटनी का फैसला लिया, जिसमें इंजीनियर, डिजाइनर और प्रोडक्ट मैनेजमेंट से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।
छंटनी के साथ ही Meta ने यह भी साफ कर दिया है कि कंपनी अब अपनी प्राथमिकताएं बदल रही है। Metaverse के बजाय अब फोकस होगा:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
AI-पावर्ड स्मार्ट डिवाइसेज़
स्मार्ट ग्लासेस और वियरेबल टेक्नोलॉजी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को AI के ज़रिये और अधिक स्मार्ट बनाना
कंपनी का मानना है कि AI आधारित प्रोडक्ट्स ज्यादा व्यावहारिक हैं और इनसे तुरंत व्यावसायिक लाभ मिलने की संभावना है।
छंटनी के बाद LinkedIn और अन्य प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म्स पर Meta के पूर्व कर्मचारियों की “Open to Work” पोस्ट्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। इससे यह साफ है कि टेक इंडस्ट्री के अनुभवी प्रोफेशनल्स अब नए अवसरों की तलाश में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह छंटनी सिर्फ Meta तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री में Metaverse से जुड़े निवेश पर पुनर्विचार शुरू हो सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, Metaverse पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन फिलहाल यह “लॉन्ग-टर्म सपना” बन गया है।
जबकि AI, क्लाउड और ऑटोमेशन जैसी टेक्नोलॉजीज़ तुरंत उपयोग और मुनाफे का रास्ता दिखा रही हैं।
Meta का यह कदम इस बात का संकेत है कि अब टेक कंपनियां फ्यूचर विज़न से ज्यादा प्रैक्टिकल बिज़नेस मॉडल पर ध्यान दे रही हैं।
Meta द्वारा 1000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी यह दर्शाती है कि टेक्नोलॉजी की दुनिया में बड़े सपने भी बाजार की हकीकत के आगे टिक नहीं पाते।
जिस Metaverse को कभी इंटरनेट का अगला अध्याय बताया गया था, वह फिलहाल Meta की प्राथमिकताओं से बाहर होता दिख रहा है।
अब देखना यह होगा कि Mark Zuckerberg की अगुवाई में Meta, AI के सहारे फिर से वही जादू चला पाती है या नहीं, जिसने कभी Facebook को दुनिया का सबसे बड़ा सोशल नेटवर्क बनाया था।